अमेरिका – ईरान – इज़राइल युद्ध को आरम्भ हुए तीन सप्ताह से अधिक हो गए हैं। युद्ध की आग से पूरा मिडल ईस्ट तो जल ही रहा है , विश्व के दूसरे देश भी इसके दुष्प्रभाव से बचे नहीं हैं। विश्व की आर्थिकी तो बदल ही रही है किंतु पेट्रोलियम पदार्थों की आवाजाही में हो रहे व्यवधान के कारण स्थिति अधिक गंभीर होती नजर आ रही है । इस संकट से विश्व समुदाय के सभी राष्ट्र निपटने के लिए अपने अपने साधनों और नीति से प्रबंध कर रहे हैं। भारत भी इस संकट से समय रहते निपटने के लिए युद्ध स्तर पर पर्यास कर रहा है । सरकार दिन रात व्यवस्था पर नजर बनाए हुए है और देश में संकट की स्थिति न आए इसका पूरा पर्यास किया जा रहा है । सरकार लगभग प्रतिदिन देश की जनता को आश्वस्त कर रही है फिर भी देश के कुछ हिस्सों में जनता में अनावश्यक पेनिक की स्थिति पेदा की जा रही है । इसमें कोई आश्चर्य नहीं है । यह मानवीय प्रवृत्ति है ।आम जनता जो सुनती है उस पर तुरंत प्रतिक्रिया स्वरूप अपने आप को सुरक्षित करने का पर्यास शुरू कर देती है । कौवा कान ले गया और सब कौवे के पीछे डॉज लगते हैं लेकिन कान को छूकर भी कोई चेक करने का पर्यास नहीं करता । शेर आ रहा है, सबको खा जाएगा लेकिन शेर कभी आता नहीं। इसका श्रेय सबसे पहले हमारे सत्ता लोलुप विपक्षी राजनीतिज्ञों को जाता है उसके बाद कुछ मुनाफाखोर भी इसमें शामिल हो जाते हैं । रही सही कसर दुश्मन देश के खुफिया एजेंट और मीडिया पूरी कर देते हैं। क्या किसी परिवार में आए किसी संकट से निपटने की जिम्मेदारी केवल परिवार के मुखिया की होती है? क्या विश्व स्तरीय किसी संकट से निपटना केवल सरकार का ही दायित्व है? अफ़सोस ! सरकार पूरे पर्यास कर रही है, स्थिति बिल्कुल भी चिंताजनक नहीं है । आग की तपस हमें हानि न पहुँचा सके , यह सुनिश्चित किया जा रहा है लेकिन हमारे देश के कुछ सत्ता लोलुप राजनीतिज्ञ सरकार को बदनाम करने का अवसर नहीं छोड़ते। उन्हें देश में किसी संकट से मिलजुलकर निपटने की नहीं बल्कि देश में अराजकता की स्थिति पैदा कर अपना उल्लू सिद्ध करने की चिंता रहती है । कभी सेना के पराक्रम पर प्रश्न लगाए जाते हैं तो कभी देश से बाहर बयानबाजी कर देश की संप्रभुता को ही कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है । जनता में भ्रम और अफवाहों भरे बयान जारी कर देश का माहौल खराब किया जाता है । कोई उन्हें समझाए कि सरकार की आलोचना करते करते ऐसे सत्ता लोलुप देश द्रोह का अपराध कर रहें हैं । अपने ही घर को घर के चिराग आग लगाने को आतुर दिखायी देते हैं । कभी धार्मिक और जातिवादी घृणात्मक बयान बाजी की जाती है कभी विदेशी घुसपैठियों को संरक्षण देकर देश के संसाधनों पर डकैती डाली जाती है । अपने ही नागरिकों की रोटी घुसपैठियों को खिलायी जाती है । यही नहीं , जयचंद बनते हुए विदेशी शक्तियों के साथ बाकायदा देश में सत्ता परिवर्तन के लिए सहयोग का अनुबंध भी कर लिया जाता है । क्या ऐसी राजनीति देश के लिए हितकारी हो सकती हे? कदापि नहीं । हाल की स्थिति की और नजर डालें तो सरकार बार बार पारदर्शिता के साथ देश में पेट्रोल और गैस की उपलब्धता को सुनिश्चित कर रही है लेकिन देश के ही कुछ सत्तालोलुप राजनीतिज्ञ और उच्च पदस्थ राजनेता अफ़वाहें फैलाकर जनता में पैनिक की स्थिति उत्पन्न कर रहें है । ऐसा कर अपने विपक्षी धर्म का पालन नहीं बल्कि देश में अराजकता की स्थिति पैदा कर अपना स्वार्थ सिद्ध किया जा रहा है । यह सरकार के विरुद्ध ही नहीं ,देश के विरुद्ध भी एक प्रकार से देश को कमजोर करने और अवयवस्था की स्थिति उत्पन्न करने का षड्यंत्र चल रहा है । क्या देशप्रेम का आचरण केवल जनता के लिए है? ऐसे देशविरोधी नेताओं के लिए नहीं ? एक साधारण अनभिज्ञ नागरिक अफ़वाह फैलाता पकड़ लिया जाय तो तुरंत जेल भेज दिया जाएगा लेकिन ऐसे नेताओं की निरंकुश बयानबाज़ी पर मौन क्यों साधा जाता है ? ऐसा ही है तो हम किस समान नागरिक संहिता का ढिंढोरा पीटते हैं ? सरकार को चाहिए कि ऐसे अफ़वाह फैलाने वाले समाज और देश के दुश्मन नेताओं के विरुद्ध तुरंत सख्त वैधानिक कार्यवाही करें । संविधान ने बोलने की आज़ादी दी है, देश में आग उगलने की नहीं । बोलने की स्वतंत्रता के दुरुपयोग की अनुमति नहीं दी जा सकती। हमारा , देश के नागरिकों , का भी कर्तव्य है कि किसी भी भावी संकट के समय हमें एकजुट होकर संकट से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए । स्थिति कैसी भी हों, सरकार पर भरोसा रखें , सहयोग बनाए रखें और अफवाहों पर ध्यान न दें बल्कि ऐसे व्यक्तियों पर सख्त नजर रखते हुए अफवाहों को फैलने से रोकें। सोशल मीडिया पर चल रहे नकारात्मक और भ्रामक संदेशों को कदापि अग्रसारित न करें और न ही उनपर विश्वास करें । कुछ पत्रकार भी इस समय समाचार और जागरूकता के नाम पर नकारात्मक संदेश दे रहें हैं । प्रेस की आज़ादी का अर्थ यह नहीं कि प्रायोजित एजेंडे के तहत देश में नकारात्मक नैरेटिव चलाया जाय । देश हित सर्वोपरि , इसलिए ऐसे पत्रकार बंधु भी ध्यान रखें कि यह देश उनका भी है, यहाँ घर उनका भी है । पड़ोस में चिंगारी फूटेगी तो आसपास के सभी घर उसकी जड़ में आ जाएँगे।देश की जनता और इसी सरकार ने एकजुटता के साथ कोरोना जैसे संकट का समाधान कर विश्व का मार्गदर्शन किया है । विश्व में कहीं भी आग लगेगी तो हम भी उसकी तपिश से बच नहीं सकते । समझदारी यही है कि हम मिलकर समाधान के लिए समय रहते तैयार हो जायें। आइए हम सब मिलकर पुनः विश्व को साबित करें कि भारतवासी प्रत्येक संकट का समाधान करने के लिए पूर्णतः सक्षम हैं । हम एकजुट रहेंगे तो शक्तिशाली रहेंगे , बटेंगे तो कमजोर होकर टूट जाएँगे । देश की संप्रभुता और एकता में ही हमारी शक्ति निहित है । श्री राम के आदर्शों का अनुसरण करते हुए अपनी मर्यादा का पालन करें और माँ काली की भांति पाप मर्दन से पीछे न हटें। आप सभी को राम नवमी और माँ काली शक्ति स्वरूपा नवमी की हार्दिक शुभकामनाएं ।